मैथिली व्याकरण: शिक्षण प्रवेशिका
डॉ.
अरुणाभ सौरभ
वाक्य
परिभाषा:
सार्थक शब्दक एहन समूह, जेकर आशय पूर्णत: स्पष्ट होइ, वाक्य कहल जाइत
अछि |
वाक्य-भेद
वाक्यक वर्गीकरण दुइ प्रकार सँ
कएल जा सकैत अछि-
1 अर्थक दृष्टि सँ
2 रचनाक दृष्टि सँ |
अर्थक दृष्टि सँ वाक्यक आठ भेद कएल जा सकैछ-
1 विधानवाचक वाक्य
2 निषेधवाचक वाक्य
3 आज्ञावाचक वाक्य
4 प्रश्नवाचक वाक्य
5 विस्मयवाचक वाक्य
6 संदेहवाचक वाक्य
7 इच्छावाचक वाक्य
8 संकेतवाचक वाक्य
1 विधानवाचक वाक्य -
विधानवाचक वाक्य मे क्रियाक हेबाक अथवा ओकर प्रक्रियाक बोध होइत अछि |
उदाहरण- ओ घर जेतीह |
हम कहने रही जे ओ घर जरूरे जेतीह |
अजित जी मधुबनी जेताह ।
2 निषेधवाचक वाक्य
– जाहि वाक्यमे कार्य नहि हेबाक भाव प्रकट
होइत अछि, निषेधवाचक वाक्य कहल जाइत अछि |
उदाहरण-
हम भोजन नहि केलहुँ |
अहाँ
गाम नहि जा रहल छी|
3 आज्ञावाचक वाक्य
– ओ वाक्य जकरा द्वारा कोनो प्रकारक आज्ञा देल जाइत हो, आज्ञावाचक वाक्य कहल जाइत अछि |
उदाहरण : सभ गोटे शांत भऽ जाउ |
अहाँ लोकनि बैस जाउ ।
4 प्रश्नवाचक वाक्य:
ओ वाक्य जाहि मे प्रश्न कएल जाइत अछि, प्रश्नवाचक
वाक्य
कहल जाइत अछि |
उदाहरण : अहाँ कोन पोथी पढि रहल छी?
राजकमल चौधरी बेसी रुचैत अछि कि धूमकेतु?
अहाँक प्रिय कवि के
छथि ?
5 विस्मयवाचक वाक्य:
ओ वाक्य जाहि मे कोनो प्रकारक गहन अनुभूतिक प्रदर्शन कएल जाइत अछि, विस्मयादिवाचक वाक्य कहल जाइत अछि | हर्ष, शोक, विस्मय, आश्चर्य आदिक लेल
एहि प्रकारक चिह्नक प्रयोग कएल जाइछ- (!)
उदाहरण : वाह ! कोसीक पानि साफ चकचक अछि |
ओह ! कतेक ठंडा पानि अछि |
बाप रे बाप एतेक बड्का सांप !
आहिरे जीवकांत जी नहि रहलाह !
6 संदेहवाचक वाक्य:
ओ वाक्य जाहि मे कोनो कार्य केर संदेहक बोध कराओल जाइत अछि, संदेहवाचक
वाक्य कहल
जाइत अछि | एहि मे संशय,संदेह
आदिक स्थिति बनल रहैत अछि ।
उदाहरण : महेंद्र बाबू अओताह कि नहि ।
चुन्नू जी काज केने हेताह कि नहि ?
काल्हि साइत अशोक जी बोरिंग रोड चौराहा पर छलाह |
7 इच्छावाचक वाक्य:
ओ वाक्य जाहि मे कोनो इच्छा, आकांक्षा या आशीर्वाद केर बोध
कराओल जाइत अछि, इच्छावाचक वाक्य कहल जाइत अछि |
उदाहरण : नववर्ष मंगलमय होइ |
अपनेक दिन शुभ हुअए |
8 संकेतवाचक वाक्य:
ओ वाक्य जाहि मे एक क्रियाक दोसर क्रिया पर निर्भर होयबाक बोध/संकेत होइ संकेतवाचक
वाक्य कहल जाइत अछि | एहि वाक्य मे संकेतक बोध होयत
अछि तेँ संकेतवाचक वाक्य
कहल गेल अछि |
उदाहरण : गोविंद बाबूक डेरा ओमहर छनि |
एमहर आउ |
रमानंद झा रमण जी ओमहर रहैत छथि ।
अर्थक आधार पर
वाक्य-परिवर्तन
वाक्यक अर्थ मे बिना कोनो तरहक परिवर्तन केने एक
प्रकार सँ
दोसर प्रकारक वाक्यमे परिवर्तित करनाय वाक्य-परिवर्तन कहल जाएत अछि।
विधानवाचक वाक्यक परिवर्तन
कुमार गगन नाटक खेलाय छ्थि ।
१ - विधानवाचक वाक्य - कुमार गगन नाटक खेलाय छथि ।
२ - आज्ञावाचक वाक्य -
कुमार गगन! नाटक खेलाओ ।
३ - निषेधवाचक वाक्य -
कुमार गगन नाटक नहि खेलाय छथि ।
४ - प्रश्नवाचक वाक्य -
की कुमार गगन नाटक खेलाय छथि
?
५ - विस्मयादिवाचक वाक्य - वाह! कुमार गगन नाटक
खेलाय छथि ।
६ - इच्छावाचक वाक्य –
ओह कुमार गगन नाटक खेलैबतैथ !
७ -संदेहवाचक वाक्य -
कुमार गगन नाटक खेलायत हेताह ।
८ - संकेतवाचक वाक्य – जौं कुमार गगन नाटक
खेलाबथि तऽ
दर्शकक कोनो कमी नहि रहत ।
रचनाक आधार पर/ रूपक आधार पर वाक्य भेद
रचनाक आधार पर वाक्यक तीन भेद कएल गेल अछि-
1. सरल
वाक्य
2. संयुक्त
वाक्य
3. मिश्र
वाक्य
सरल वाक्य- जाहि
वाक्य मे एक पूर्ण क्रिया आ कर्त्ता रहए ताहि वाक्य केँ सरल वाक्य कहल जाइत अछि । यथा- गुफरान पोथी लिखि रहल
छथि ।
गोपाल गेलाह ।
रामकुमार जी भोजन कऽ रहल छथि ।
संयुक्त वाक्य- जाहि वाक्य मे दू वा दू
सँ अधिक खण्डवाक्य रहए ताहि वाक्य केँ संयुक्त वाक्य कहल जाइत अछि । एहि वाक्यक प्रत्येक खण्ड वाक्य स्वतंत्र
रहैछ । एहि वाक्यमे आ, ओ, आओर, तथा, मुदा इत्यादि समानाधिकरण अव्यय अबैछ । अर्थात जाहि वाक्य
मे सामान दरजाक अनेक उपवाक्य संयोजक सँ जोडल रहए ।
यथा- मुख्तार आलम कवि छथि मुदा ओ अध्यापक छथि ।
अभय बड्ड प्रतिभाशाली छथि
मुदा घरक गरीब ।
एहि दुओ वाक्य मे दू स्वतंत्र
खण्डवाक्य ‘मुदा’ संयोजक द्वारा संयुक्त कएल गेल अछि ।
मिश्र वाक्य- जाहि वाक्य मे दू वा दू सँ अधिक खण्डवाक्य रहए मुदा मुख्य
खण्डवाक्य आ अन्य सहायक खण्डवाक्य हो ताहि वाक्य केँ मिश्र वाक्य कहल जाइत अछि । एहि वाक्य मे सहायक खण्डवाक्य
संज्ञा, विशेषण आ क्रिया विशेषण खण्डवाक्य रहैछ । जे, जेना, तेना, जहिया, जतए, यदि, अथवा, जहन,जौं , यथा, तथा, अत: , अतएव इत्यादि
संयोजक खण्डवाक्य केँ मिलबैछ ।
जौं वर्षा नहि भेल तऽ अकाल
पडत ।
गुंजन श्री देखलनि जे मारिते
रास दहीक छांछी राखल अछि ।
संयुक्त वाक्यमे दुओ उपवाक्य
समकक्ष रहैत अछि, मिश्रवाक्य मे एक उपवाक्य प्रधान (मुख्य उपवाक्य) रहैत अछि
आ दोसर अप्रधान ( आश्रित उपवाक्य) रहैत अछि ।
अरविंद अक्कू जे नाटककार
छथि फुटानी चौक शीर्षक सँ नव नाटक लिखलनि !
कारक प्रकरण
(मैथिली)
भाषा विज्ञान
अंतर्गत रूपविज्ञानक सन्दर्भ मे, कोनो वाक्य, मुहावरा
वा वाक्यांश मे संज्ञा वा सर्वनामक क्रियाक संग ओकर सम्बन्धक अनुसार रूप बदलनाय
कारक कहल जायत अछि। पं गोविंद झा 'मैथिली परिशीलन' पृ-95 मे शब्दरूप विवेचन अंतर्गत लिखैत छथि- ''कारक शब्दक अर्थ थिक कयनिहार अर्थात कोनो क्रिया (काज) करय से ।''
युगेश्वर झाक परिभाषा छनि- ''जे शब्द क्रियाक उत्पत्ति मे सहयक हो से थीक कारक ।''(मैथिली व्ययाकरण आओर रचना-पृ-24, भारती भवन) भारतीय भाषा मे कारकक कुल आठ भेद मानल गेल यथा- कर्त्ता, कर्म, करण, सम्प्रदान, अपादान, सम्बंध, अधिकरण आ सम्बोधन । जर्मन मे चारि आ कारक अंग्रेज़ी मे तीन जकरा Case कहल जाइछ ।
''Case is the grammatical function of a noun or pronoun. There are only three cases in modern English, they are subjective (he), objective (him) and possessive (his). They may seem more familiar in their old English form - nominative, accusative and genitive. There is no dative case in modern English.''
युगेश्वर झाक परिभाषा छनि- ''जे शब्द क्रियाक उत्पत्ति मे सहयक हो से थीक कारक ।''(मैथिली व्ययाकरण आओर रचना-पृ-24, भारती भवन) भारतीय भाषा मे कारकक कुल आठ भेद मानल गेल यथा- कर्त्ता, कर्म, करण, सम्प्रदान, अपादान, सम्बंध, अधिकरण आ सम्बोधन । जर्मन मे चारि आ कारक अंग्रेज़ी मे तीन जकरा Case कहल जाइछ ।
''Case is the grammatical function of a noun or pronoun. There are only three cases in modern English, they are subjective (he), objective (him) and possessive (his). They may seem more familiar in their old English form - nominative, accusative and genitive. There is no dative case in modern English.''
कारक चिह्न उदाहरण
सहित एना बूझल जेबाक चाही-
कारक चिह्न उदाहरण
क्रियापद
कर्त्ता- 0 अजित आज़ाद 0 0
कर्म- कां,केँ, काँ अजित आज़ाद आमकेँ/आम खसओलनि
करण- सँ, ए अजित आज़ादअपना हाथ सँ आम खसओलनि
सम्प्रदान- कए, लेल, हेतु,केँ-अजित आज़ाद अपना लेल/हेतु आम खसओलनि
अपादान- सँ अजित आज़ाद डारिसँ आम खसओलनि
संबंध- क, केर अजित आज़ाद मैथिलीक कवि छथि
अजित आज़ाद मैथिली केर कवि छथि
अधिकरण- मे, पर,माँझ, मध्य,हि अजित आज़ाद गाछ पर चढल छथि
/मधुमांछी गाछ मे लुधकल अछि
जाहि गाछ माँझ अजित आज़ाद चढल छथि ओहि मे मधुमांछी लुधकल अछि
ओ गाम पर रहैत छथि
संबोधन- हे, हो,अरे,रे,रौ,हौ,हओ,रओ
हे अजित आज़ाद !आब गाछ पर सँ उतरू
रौ अजित आज़ाद !आब गाछ पर सँ उतर
हौ अजित आज़ाद !आब गाछ पर सँ उतरह
(सम्प्रदान मे सेहो केँ चिह्नक प्रयोग हएत)
कर्त्ता- 0 अजित आज़ाद 0 0
कर्म- कां,केँ, काँ अजित आज़ाद आमकेँ/आम खसओलनि
करण- सँ, ए अजित आज़ादअपना हाथ सँ आम खसओलनि
सम्प्रदान- कए, लेल, हेतु,केँ-अजित आज़ाद अपना लेल/हेतु आम खसओलनि
अपादान- सँ अजित आज़ाद डारिसँ आम खसओलनि
संबंध- क, केर अजित आज़ाद मैथिलीक कवि छथि
अजित आज़ाद मैथिली केर कवि छथि
अधिकरण- मे, पर,माँझ, मध्य,हि अजित आज़ाद गाछ पर चढल छथि
/मधुमांछी गाछ मे लुधकल अछि
जाहि गाछ माँझ अजित आज़ाद चढल छथि ओहि मे मधुमांछी लुधकल अछि
ओ गाम पर रहैत छथि
संबोधन- हे, हो,अरे,रे,रौ,हौ,हओ,रओ
हे अजित आज़ाद !आब गाछ पर सँ उतरू
रौ अजित आज़ाद !आब गाछ पर सँ उतर
हौ अजित आज़ाद !आब गाछ पर सँ उतरह
(सम्प्रदान मे सेहो केँ चिह्नक प्रयोग हएत)
-विराम
चिह्नक प्रयोग बुझबा मे आसानीक लेल नहि केने छी !
परिवर्तनकारी
व्याकरण
परिवर्तनकारी व्याकरण व्याकरणक एकटा सिद्धांत अछि जाहिमे भाषाई परिवर्तन आ
वाक्यांश संरचना द्वारा भाषाक निर्माणक जिम्मेदारी अछि। एकरे ट्रांसफॉर्मल-जेनरेटिव
ग्रामर वा टी-जी या टीजीजी केर रूप मे सेहो जानल जाइत अछि।
1957 मे नोम चोम्स्कीक पुस्तक सिन्टैक्टिक स्ट्रक्चर्सक प्रकाशनक बाद, परिवर्तनकारी
व्याकरण भाषाविज्ञानक क्षेत्र मे अगिला किछु दशक धरि हावी रहल।
"The era of Transformational-Generative Grammar, as it is called,
signifies a sharp break with the linguistic tradition of the first half of the
[twentieth] century both in Europe and America because, having as its principal
objective the formulation of a finite set of basic and transformational rules that
explain how the native speaker of a language can generate and comprehend all
its possible grammatical sentences, it focuses mostly on syntax and not on
phonology or morphology, as structuralism does" (Encyclopedia of
Linguistics, 2005).
अर्थात
"परिवर्तनशील-जनरेटिव ग्रामरक युग, जेहन कहल जाइत अछि,
यूरोप आ अमेरिका दुओ मे [बीसम शताब्दी] केर पहिल छमाहीक भाषाई
परंपराक संग एकटा तीव्र विरामक संकेत दैत अछि, एकर प्रमुख
उद्देश्यक रूप मे एकटा परिमित सेटक निर्माण अछि। बुनियादी आ परिवर्तनकारी नियम मे
बताओल गेल अछि जे कोनो भाषाक मूल वक्ता अपन सभटा संभव व्याकरणिक वाक्य कें कोना
उत्पन्न आ बूझि सकैत अछि, ई बेसीरास वाक्यविन्यास पर
केंद्रित अछि नहि कि ध्वनिविज्ञान वा आकृति विज्ञान पर, जेना
कि संरचनावाद । "(भाषा विज्ञान का विश्वकोश, 2005)।
Observations
- "The new linguistics, which began in 1957
with the publication of Noam Chomsky's Syntactic Structures,
deserves the label 'revolutionary.' After 1957, the study of grammar would
no longer be limited to what is said and how it is interpreted. In fact,
the word grammar itself took on a
new meaning. The new linguistics defined grammar as
our innate, subconscious ability to generate language, an internal system
of rules that constitutes our human language capacity. The goal of the new
linguistics was to describe this internal grammar.
"Unlike the structuralists, whose goal was to examine the sentences we actually speak and to describe their systemic nature, the transformationalists wanted to unlock the secrets of language: to build a model of our internal rules, a model that would produce all of the grammatical—and no ungrammatical—sentences." (M. Kolln and R. Funk, Understanding English Grammar. Allyn and Bacon, 1998
- नव भाषाविज्ञान, जे 1957 मे नोआम चॉम्स्की केर सिंथेटिक संरचना केर प्रकाशन सं शुरू
भेल, एकर स्तर 'क्रांतिकारी' के छल। 1957क बाद, व्याकरण अध्ययन मे आब केवल वएह नहि हएत जे कहल जाइत अछि आ एकर
व्याख्या कोना कएल जाएत अछि। वास्तव मे, व्याकरण शब्द
एकटा नव अर्थ लेलक अछि। नव भाषाविज्ञान व्याकरण कें हमार जन्मजात, भाषा उत्पन्न करबाक क्षमताक रूप मे परिभाषित केलक अछि। नियमक एक
आंतरिक प्रणाली जे हमार मानव भाषा क्षमताक गठन करैत अछि। नव भाषा विज्ञानक
लक्ष्य एहि आंतरिक व्याकरणक वर्णन करनाय छल ।
·
"संरचनावादीक विपरीत, जकर
लक्ष्य ओहि वाक्यक जांच करनाय छल जे हम वास्तव मे बजैत छी आ ओकर प्रणालीगत
प्रकृतिक वर्णन करबाक लेल, परिवर्तनवादी भाषाक रहस्य कें
खोलनाय छल : हमर आंतरिक नियमक एकटा मॉडलक निर्माण करबाक लेल, एक मॉडल जे व्याकरणक सभटा उत्पादन
करत। —आर कोनो अस्वाभाविक - वाक्य। (एम. कोलन and आर. फंक, अंडरस्टैंडिंग
इंग्लिश ग्रामर.
एलिन आ बेकन, 1998
साभार;
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